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नया साल कुछ ऐसे आया, जैसे इश्क़ की ज़बान पर, एक छाला उठ आया: अमृता प्रीतम

इरशाद

नया साल कुछ ऐसे आया, जैसे इश्क़ की ज़बान पर, एक छाला उठ आया: अमृता प्रीतम

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जैसे सोच की कंघी में से
एक डंडा टूट गया
जैसे समझ के कुर्ते का
एक चीथड़ा उड़ गया
जैसे आस्था की आँखों में
एक तिनका चुभ गया
नींद ने जैसे अपने हाथों में
सपने का जलता कोयला पकड़ लिया
नया साल कुझ ऐसे आया... आगे पढ़ें

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