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कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है: हकीम नासिर

इरशाद

कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है: हकीम नासिर

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है 
वो एक शख़्स जो सच-मुच ख़ुदाओं जैसा है 

हमारी शम-ए-तमन्ना भी जल के ख़ाक हुई 
हमारे शो'लों का आलम चिताओं जैसा है 

वो बस गया है जो आ कर हमारी साँसों में 
जभी तो लहजा हमारा दुआओं जैसा है  आगे पढ़ें

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