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Gopaldas neeraj hindi kavita akhiri khat

इरशाद

आज की रात तुझे आख़िरी ख़त और लिख दूं - गोपालदास नीरज

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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आज की रात तुझे आख़िरी ख़त और लिख दूं
कौन जाने यह दिया सुबह तक जले न जले ?
बम्ब बारुद के इस दौर में मालूम नहीं 
ऐसी रंगीन हवा फिर कभी चले न चले।

जिन्दगी सिर्फ है खूराक टैंक तोपों की 
और इन्सान है एक कारतूस गोली का 
सभ्यता घूमती लाशों की इक नुमाइश है
और है रंग नया खून नयी होली का।

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