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Firaq gorakhpuri nazm sheershak dhoondne wale kavi se

इरशाद

अगर आपको भी नहीं मिलते कविता के शीर्षक तो पढ़ें यह कविता...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कविता का शीर्षक ढूंढ़ने वाले, यह भी कोई बात हुई
सड़कों पर चल, बाज़ारों में जा, गलियों के चक्कर काट कभी
इस चलती फिरती दुनिया में, तांगों में, बसों में, ट्रामों में
ठेलेवालों, रिक्शेवालों, इक्केवालों के अड्डे पर
स्टेशनों के हंगामों में, ट्रेनों की रेलों पेलों में
काँधे से जहाँ काँध छिलते हैं ऐसे मेलों ठेलों में
रस्तों पर खेलते बच्चों में, दफ़्तर को जाते बाबुओं में
बीड़ीवालों, खोमचेवालों, तम्बोलियों की दुकानों पर
टोलों में, महलों में, क़स्बों में, देहातों में, शहरों में
खेतों में झक मार रहे हैं उन कंगाल किसानों में

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