लीलाधर जगूड़ी : मुक्तियात्रा

लीलाधर जगूड़ी
                
                                                             
                            मुक्तियात्रा 
                                                                     
                            

ड्राइवर !
हम हैं तुम्हारे गाँव के लोग
जागो

ड्राइवर !
देखो, चीज़ों में अब भी स्वाद है
हमारे पास रोटी और साग है
खाओगे ?
कुएँ का जल है; पिओगे ?

-कहाँ जाना है ?

ड्राइवर !
हमें राजधानी से अपना गाँव
छुड़ाकर लाना है। 

- लीलाधर जगूड़ी 

साभार - कविता कोश
4 years ago

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