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Daagh Dehlvi

इरशाद

दाग़ देहलवी की ग़ज़ल: फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं 
जहाँ बजते हैं नक़्क़ारे वहीं मातम भी होते हैं 

गिले शिकवे कहाँ तक होंगे आधी रात तो गुज़री 
परेशाँ तुम भी होते हो परेशाँ हम भी होते हैं 

जो रक्खे चारागर काफ़ूर दूनी आग लग जाए 
कहीं ये ज़ख़्म-ए-दिल शर्मिंदा-ए-मरहम भी होते हैं  आगे पढ़ें

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