आपका शहर Close
Hindi News ›   Kavya ›   Irshaad ›   bismil saeedi ghazal kaun samjhe ishq ki dushvariyan
bismil saeedi ghazal kaun samjhe ishq ki dushvariyan

इरशाद

बिस्मिल सईदी की ग़ज़ल 'कौन समझे इश्क़ की दुश्वारियां'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

275 Views

कौन समझे इश्क़ की दुश्वारियाँ
इक जुनूँ और लाख ज़िम्मेदारियाँ

एहतिमाम-ए-ज़िंदगी-ए-इश्क़ देख
रोज़ मर जाने की हैं तैयारियाँ

इश्क़ का ग़म वो भी तेरे इश्क़ का
कौन कर सकता मिरी ग़म-ख़्वारियाँ

बे-ख़ुदी-ए-इश्क़ जैसे ग़म की नींद
ग़म की नींदें रूह की बेदारियाँ

इश्क़ भी है किस क़दर बर-ख़ुद-ग़लत
उन की बज़्म-ए-नाज़ और ख़ुद्दारियाँ

इस मोहब्बत उस जवानी की क़सम
फिर न ये नींदें न ये बेदारियाँ

ये नियाज़-ए-आरज़ूमंदी न देख
और कुछ हैं इश्क़ की ख़ुद्दारियाँ

इख़्तिलाज-ए-क़ल्ब के दौरे नहीं
इश्क़ की 'बिस्मिल' हैं दिल-आज़ारियाँ

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!