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birthday special agyeya ishaare zindagi ke

इरशाद

जन्मदिन स्पेशल: अज्ञेय से समझें 'इशारे ज़िंदगी के...'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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ज़िंदगी हर मोड़ पर करती रही हमको इशारे
जिन्हें हमने नहीं देखा।
क्योंकि हम बाँधे हुए थे पट्टियाँ संस्कार की
और हमने बाँधने से पूर्व देखा था-
हमारी पट्टियाँ रंगीन थीं
ज़िंदगी करती रही नीरव इशारे :
हम छली थे शब्द के।
'शब्द ईश्वर है, इसी में वह रहस्य है :
शब्द अपने आप में इति है-
हमें यह मोह अब छलता नहीं था।
शब्द-रत्नों की लड़ी हम गूँथकर माला पिन्हाना चाहते थे
नए रूपाकार को
और हमने यही जाना था
कि रूपाकार ही तो सार है।
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एक नीरव नदी बहती जा रही थी...

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