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रिश्तों की अहमियत को समझाती भारत भूषण पन्त की ग़ज़ल...

इरशाद

रिश्तों की अहमियत को समझाती भारत भूषण पन्त की ग़ज़ल...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं 
आपस में घर-बार उलझने लगते हैं 

माज़ी की आँखों में झाँक के देखूँ तो 
कुछ चेहरे हर बार उलझने लगते हैं 

साल में इक ऐसा मौसम भी आता है 
फूलों से ही ख़ार उलझने लगते हैं  आगे पढ़ें

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