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उदय प्रकाश

इरशाद

मेरे कंधों पर चढ़ो और फिसलो: उदय प्रकाश

काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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तुम मिसरी की डली बन जाओ
मैं दूध बन जाता हूं
तुम मुझमें
घुल जाओ ।

तुम ढाई साल की बच्ची बन जाओ
मैं मिसरी घुला दूध हूं मीठा
मुझे एक सांस में पी जाओ। आगे पढ़ें

अब मैं मैदान हूं

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