आपका शहर Close
Hindi News ›   Kavya ›   Irshaad ›   Best hindi Poem of Mathilisharan Gupt Gungan
मैथिलीशरण गुप्त

इरशाद

तेरे घर के द्वार बहुत हैं, किसमें हो कर आऊं मैं: मैथिलीशरण गुप्त

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

847 Views
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें हो कर आऊं मैं?
सब द्वारों पर भीड़ मची है,
कैसे भीतर आऊं मैं?

द्वारपाल भय दिखलाते हैं,
कुछ ही जन जाने पाते हैं,
शेष सभी धक्के खाते हैं,
क्यों कर घुसने पाऊं मैं?
तेरे घर के द्वार बहुत हैं,
किसमें हो कर आऊं मैं? आगे पढ़ें

तेरी विभव कल्पना कर के

Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Your Story has been saved!