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हरिवंश राय बच्चन

इरशाद

अकेलेपन का बल पहचान: हरिवंश राय बच्चन

अमर उजाला, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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अकेलेपन का बल पहचान !

शब्द कहां जो तुझको टोके,
हाथ कहां जो तुझको रोके,
राह वही है, दिशा वही, तू करे जिधर प्रस्थान 
अकेलेपन का बल पहचान !

जब तू चाहे तब मुस्काये,
जब चाहे तब अश्रु बहाये,
राग वही तू जिसमें गाना चाहे अपना गान !
अकेलेपन का बल पहचान !

तन-मन अपना, जीवन अपना 
अपना ही जीवन का सपना 
जहां और जब चाहे र दे तू सबकुछ बलिदान !
अकेलेपन का बल पहचान !

साभार:कविताएं बच्चन की चयन अमिताभ बच्चन का, संपादन-पुष्पा भारती (भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन)
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