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प्रतीकात्मक तस्वीर

इरशाद

फ़ैसल अजमी: कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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तेरी आँखें न रहीं आईना-ख़ाना मिरे दोस्त 
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त 

जाने किस काम में मसरूफ़ रहा बरसों तक 
याद आया ही नहीं तुझ को भुलाना मिरे दोस्त 

पूछना मत कि ये क्या हाल बना रक्खा है 
आईना बन के मिरा दिल न दुखाना मिरे दोस्त  आगे पढ़ें

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