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अमृता प्रीतम की 3 चुनिंदा कविताएं...

इरशाद

अमृता प्रीतम की 3 चुनिंदा कविताएं...

काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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बरसों की आरी हंस रही थी
घटनाओं के दांत नुकीले थे
अकस्मात एक पाया टूट गया
आसमान की चौकी पर से
शीशे का सूरज फिसल गया

आंखों में ककड़ छितरा गये
और नजर जख्मी हो गयी
कुछ दिखायी नहीं देता
दुनिया शायद अब भी बसती है आगे पढ़ें

रात ऊँघ रही है...

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