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bekal utsahi ghazal jab dil ne tadapna chhod diya

इरशाद

पोशाक बहारों ने बदली फूलों ने महकना छोड़ दिया - बेकल उत्साही

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जब दिल ने तड़पना छोड़ दिया
जलवों ने मचलना छोड़ दिया

पोशाक बहारों ने बदली
फूलों ने महकना छोड़ दिया

पिंजरे की सम्त चले पंछी
शाख़ों ने लचकना छोड़ दिया

कुछ अबके हुई बरसात ऐसी
खेतों ने लहकना छोड़ दिया

जब से वो समन्दर पार गया
गोरी ने सँवरना छोड़ दिया

बाहर की कमाई ने बेकल
अब गाँव में बसना छोड़ दिया

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