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बल्ली सिंह चीमा

इरशाद

किसी भी सोच में उंगली को गाल पर रखना : बल्ली सिंह चीमा

अमर उजाला, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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हमारी याद को चाहो तो ताख पर रखना 
नयी जगह है वो ख़ुद को संभालकर रखना 

तुम्हें मिला हूं तो मुझको ख़्याल आया है 
तुम्हीं से सीख लूं ख़ुद को संवारकर रखना 

ये पोज भी उसकी आदत का एक हिस्सा है 
किसी भी सोच में उंगली को गाल पर रखना 

किसी दुष्यंत से  जुड़ती हैं ग़र तेरी राहें 
तो उसकी याद अंगूठी संभालकर रखना 

ये तय है कि वो आएंगे आज ही ' बल्ली' 
इसी उम्मीद में घर को संवारकर रखना

साभार: हिंदी की बेहतरीन ग़ज़लें, संपादक-रवीन्द्र कालिया ( ज्ञानपीठ प्रकाशन)
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