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काल और शक्ति

इरशाद

बालकृष्ण शर्मा नवीन: कौन कहता है कि तुमको खा सकेगा काल ?

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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राष्ट्रवादी कवि बालकृृष्ण शर्मा नवीन की कलम ओज बिखेरती है। मध्य प्रदेश के शुजालपुर में 8 दिसंबर 1897 को तथा निधन 29 अप्रैल 1960 को हुआ। उर्मिला इनकी प्रमुख कृति है। राष्ट्र शब्द से ये खासे प्रभावित थे। राष्ट्रवाद इनकी कविताओं में बरबस झलकता है। यहां हम काल को चुनौती देती उनकी एक कविता पेश कर रहे हैं। आगे पढ़ें

काल का तब धनुष, दिक् की है धनुष की डोर...

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