अशोक चक्रधर की सालों पहले लिखी गई कविता, लेकिन हर समय में प्रासंगिक: डैमोक्रैसी

अशोक चक्रधर की सालों पहले लिखी गई कविता लेकिन हर सेमय में प्रासंगिक: डैमोक्रैसी
                
                                                             
                            पार्क के कोने में
                                                                     
                            
घास के बिछौने पर लेटे-लेटे
हम अपनी प्रेयसी से पूछ बैठे-
क्यों डियर !
डैमोक्रैसी क्या होती है ?
वो बोली-
तुम्हारे वादों जैसी होती है !
इंतज़ार में
बहुत तड़पाती है,
झूठ बोलती है
सताती है,
तुम तो आ भी जाते हो,
ये कभी नहीं आती है !

https://www.facebook.com/ashokchakradhar/videos/345412239496400/

  आगे पढ़ें

2 years ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X