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ghazal

इरशाद

,ग़ज़ल

Anubhav Gupta

2 कविताएं

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तेरे कूचे तक इतने नद्दी नाले पड़ जाते हैं
कभी कभी तो तुझसे मिलने के लाले पड़ जाते हैं!!

दिल की बातें तुमसे कहने का मन करता है लेकिन
जब नज़रें टकराती हैं मुँह में ताले पड़ जाते हैं!!

उन धूपों में हमने तुझको गलियों गलियों ढूँढा है
जिन धूपों में हिरनों के भी तन काले पड़ जाते हैं!!

राहे वफ़ा में कदम कदम पर चलना भारी पड़ता है
चलते चलते पैरों में इतने छाले पड़ जाते हैं!!

पहलेवाला चोरी चुपके अब दीदार नहीं होता
कभी कभी तो उसकी खिड़की में जाले पड़ जाते हैं!!

दिल कहता है घर जाकर इज़हारे मुहब्बत कर आऊँ
लेकिन मेरे पीछे उसके घरवाले पड़ जाते हैं!!

कूचे- गली
राहे वफ़ा- वफ़ा की राह

-अनुभव गुप्ता

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