आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Irshaad ›   ameer qazalbash ghazal fikra e gurbat hai n andesh e tanhai hai
फ़िक्र-ए-ग़ुर्बत है न अंदेशा-ए-तन्हाई है: अमीर क़ज़लबाश

इरशाद

फ़िक्र-ए-ग़ुर्बत है न अंदेशा-ए-तन्हाई है: अमीर क़ज़लबाश

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

फ़िक्र-ए-ग़ुर्बत है न अंदेशा-ए-तन्हाई है 
ज़िंदगी कितने हवादिस से गुज़र आई है 

लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं 
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है 

हम न सुक़रात न मंसूर न ईसा लेकिन 
जो भी क़ातिल है हमारा ही तमन्नाई है 

ज़िंदगी और हैं कितने तिरे चेहरे ये बता 
तुझ से इक उम्र की हालाँकि शनासाई है 

कौन ना-वाक़िफ़-ए-अंजाम-ए-तबस्सुम है 'अमीर' 
मेरे हालात पे ये किस को हँसी आई है 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Your Story has been saved!