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Ali sardar jafri ghazal main jahan tum ko bulata hoon wahan tak aao

इरशाद

मैं जहां तुम को बुलाता हूं वहां तक आओ - अली सरदार जाफ़री

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मैं जहां तुम को बुलाता हूं वहां तक आओ
मेरी नज़रों से गुज़र कर दिल-ओ-जां तक आओ

फिर ये देखो कि ज़माने की हवा है कैसी
साथ मेरे मिरे फ़िरदौस-ए-जवां तक आओ

हौसला हो तो उड़ो मेरे तसव्वुर की तरह
मेरी तख़्य्युल के गुलज़ार-ए-जिनां तक आओ

फूल के गिर्द फिरो बाग़ में मानिंद-ए-नसीम
मिस्ल-ए-परवाना किसी शम-ए-तपां तक आओ

लो वो सदियों के जहन्नम की हदें ख़त्म हुईं
अब है फ़िरदौस ही फ़िरदौस जहां तक आओ

छोड़ कर वहम-ओ-गुमां हुस्न-ए-यक़ीं तक पहुंचो
पर यक़ीं से भी कभी वहम-ओ-गुमां तक आओ

इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार
शैख़-जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुतां तक आओ

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