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 akhtar payami irshad ghazal on amarujala kavya

इरशाद

अख्तर पयामी: गम-ए-हयात की रूदाद सुन सको तो कहूं...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अख्तर पयामी की गजलें और नज्मों में मुहब्बत, भाईचारा और खुलूस के जज्बे ने हमेशा रहनुमाई की है। उनके बारे में बेधड़क यह कहा जा सकता है कि वो किसी से नफरत नहीं कर सकते थे और अपने बदतरीन दुश्मन को भी माफ कर देने की सलाहियत रखते थे। अख्तर पयामी की एक नज्म 'एक कहानी' इरशाद के तहत हम अपने पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं।  

गम-ए-हयात की रूदाद सुन सको तो कहूं
मिरी निगाह में तारे चमक के टूट गए
बड़े ही नाज से आंसू छिपा के रखे थे
पे इसको क्या करूं आंचल के तार छूट गए
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