गो तिरी ज़ुल्फ़ों का ज़िंदानी हूँ मैं: अब्दुल हमीद अदम

गो तिरी ज़ुल्फ़ों का ज़िंदानी हूँ मैं: अब्दुल हमीद अदम
                
                                                             
                            गो तिरी ज़ुल्फ़ों का ज़िंदानी हूँ मैं 
                                                                     
                            
भूल मत जाना कि सैलानी हूँ मैं 

ज़िंदगी की क़ैद कोई क़ैद है 
सूखते तालाब का पानी हूँ मैं 

चाँदनी रातों में यारों के बग़ैर 
चाँदनी रातों की वीरानी हूँ मैं  आगे पढ़ें

1 year ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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