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गो तिरी ज़ुल्फ़ों का ज़िंदानी हूँ मैं: अब्दुल हमीद अदम

इरशाद

गो तिरी ज़ुल्फ़ों का ज़िंदानी हूँ मैं: अब्दुल हमीद अदम

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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गो तिरी ज़ुल्फ़ों का ज़िंदानी हूँ मैं 
भूल मत जाना कि सैलानी हूँ मैं 

ज़िंदगी की क़ैद कोई क़ैद है 
सूखते तालाब का पानी हूँ मैं 

चाँदनी रातों में यारों के बग़ैर 
चाँदनी रातों की वीरानी हूँ मैं  आगे पढ़ें

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