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रात में जीव

हास्य

हे जीव, रात को ही मेरे कमरे में आते क्यों हो?

काव्य डेस्क

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हे जीव, तुम दिन के समय छुप जाते क्यों हो
...और रात को ही मेरे कमरे में आते क्यों हो?

मेरे कमरे में फूलों की सजावट नहीं है
गंदगी के ढेर हो, इतनी गिरावट नहीं है
संगीत और सितार की बनावट नहीं है
फिर भी मेरे कान में भैरवी बजाते क्यों हो?
हे जीव, रात को ही मेरे कमरे में आते क्यों हो?

तुम कभी हलवाई के पास जाकर भी देखो
उसकी मिठाई पर भिनभिनाकर भी देखो
बर्फी और रसमलाई पर मुंह लगाकर तो देखो
तुम मेरे ही शरीर पर निशान बनाते क्यों हो?
हे जीव, रात को ही मेरे कमरे में आते क्यों हो?

बस करो, सुन लो मेरी करुण पुकार
बहुत कर चुके हो, तुम मेरा शिकार
चले जाओ यहां से अब तो मेरे यार
तुम मुझे इस कदर सताते क्यों हो?
हे जीव, रात को ही मेरे कमरे में आते क्यों हो?
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