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हास्य

बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला

wahab khan

1 कविता

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तीरे इश्क पागल कर देता है
तोरे दुश्मन घायल कर देता है
तीर की भी दो किश्मे होती हैं अलग
तीर अगर अच्छी नजर से लगे तो कामयाबी की बुलन्दी पर पहुँचा देता है
तीर अगर बुरी नजर से लगे तो मिट्टी मे मिला देता है
बरबाद हो जाता हे जो अपने पास हे सारा
इसलिए तो कहा है बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला
दुकान दरवाजों गाडियो पर लगी है
जूतों की माला काली हडिंया भी टंगी है
बचना हे इस से क्या क्या करें हम
ताबीज बनाए पुजन करायें या बली चढ़ा दे
लगी नजर हे ये न रूकेगी चाहें कुछ भी करादें
पीछा न छोडे जब तक न निकले दिवाला
इसलिए तो कहा हे बुरी...
कोई कुछ भी उपाये बताये
कुछ को छोडे कुछ को अपनाऐ
बस इसी वहम में गुजर जायेगी जिन्दगी
सोच लो समझ लो मत डरो हिम्मत करो आगे बढ जाओ
अच्छी नजर बुरी नजर हिदायत हो कहावत हो ना दोषी ठहराओ
कामयाब हे वो जिसने डर खुदा का हे पाला
पर रहेगा हमेशा बुरी नजर...

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