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अल्हड़ बीकानेरी

हास्य

हास्यः चढ़ती जवानी मेरी, चढ़ के उतर गयी

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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चढ़ती जवानी मेरी 
चढ़ के उतर गयी
ढलती उमरिया ने मारा
मेरे राम जी

स्वर्ण भस्म खायी
कहां लौट के जवानी आयी
बाल डाई करके मैं हारा
मेरे राम जी

कानों से यूं थोड़ा-थोड़ा देता
है सुनाई मुझे

आज के जमाने की नई-नई मारुतियां
बोलती हैं मुझको खटारा
मेरे राम जी
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