आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Hasya ›   satirical poem on old age by alhad bikaneri
satirical poem on old age by alhad bikaneri

हास्य

हास्यः चढ़ती जवानी मेरी, चढ़ के उतर गयी

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

514 Views
चढ़ती जवानी मेरी 
चढ़ के उतर गयी
ढलती उमरिया ने मारा
मेरे राम जी

स्वर्ण भस्म खायी
कहां लौट के जवानी आयी
बाल डाई करके मैं हारा
मेरे राम जी

कानों से यूं थोड़ा-थोड़ा देता
है सुनाई मुझे

आज के जमाने की नई-नई मारुतियां
बोलती हैं मुझको खटारा
मेरे राम जी
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!