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ओम प्रकाश आदित्य की हास्य कविता : घर के सताए हुए आए हैं बेचारे यहां

प्रतीकात्मक तस्वीर
                
                                                                                 
                            छंद को बिगाड़ो मत, गंध को उजाड़ो मत
                                                                                                

कविता-लता के ये सुमन झर जाएंगे।

शब्द को उघाड़ो मत, अर्थ को पछाड़ो मत,
भाषण-सा झाड़ो मत गीत मर जाएंगे।  आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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