ओम प्रकाश 'आदित्य': इतिहास की परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय धड़कता था

हास्य कविता
                
                                                             
                            इतिहास की परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय धड़कता था
                                                                     
                            
थे बुरे शकुन घर से चलते ही, दाँया हाथ फड़कता था

मैंने सवाल जो याद किए, वे केवल आधे याद हुए
उनमें से भी कुछ स्कूल तकल, आते-आते बर्बाद हुए

तुम बीस मिनट हो लेट द्वार पर चपरासी ने बतलाया
मैं मेल-ट्रेन की तरह दौड़ता कमरे के भीतर आया

पर्चा हाथों में पकड़ लिया, आँखें मूंदीं टुक झूम गया
पढ़ते ही छाया अंधकार, चक्कर आया सिर घूम गया

उसमें आए थे वे सवाल जिनमें मैं गोल रहा करता
पूछे थे वे ही पाठ जिन्हें पढ़ डाँवाडोल रहा करता आगे पढ़ें

1 month ago

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