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Mahendra Ajanabi Hasya poem in hindi Rail yatra

हास्य

महेन्द्र अजनबी की हास्य कविता-रेल यात्रा

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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एक दिन हम भारी भीड़-भरी
भारतीय रेल में चढ़े
चढ़े क्या, चढ़ाए गए
कई कन्धों पर धरकर
भीतर सरकाए गए।

भीड़ का ये हाल था
मत पूछिए, कमाल था
सीट पर भी आदमी थे
बर्थ पर भी आदमी थे
और तो और
छत पर भी आदमी थे
वो तो रेल वालों ने
उससे ऊपर कोई जगह ही नहीं बनाई
वरना आदमी वहां भी होते भाई। आगे पढ़ें

कौन जाने किस पर पड़ा था

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