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हास्य

हास्य व्यंग्य: धरती का भगवान... 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दो बैलों की जोड़ी लिए किसान चला 
देखो रे वो धरती का भगवान चला 

तेरी टांगें न थकतीं, नहीं थकते बाजू तेरे 
सोना बन के निकलेंगे तू ने जहां बीज बखेरे 
अन्नदाता का रूप धरे इंसान चला 
देखो रे वो धरती का भगवान चला
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सर्दी, गर्मी, बारिश, लूएं, न ही चिंता धूप की है...

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