गोपालप्रसाद व्यास : अब मूर्ख बनो, मतिमंद बनो ! 

गोपालप्रसाद व्यास : अब मूर्ख बनो, मतिमंद बनो ! 
                
                                                             
                            बन चुके बहुत तुम ज्ञानचंद,
                                                                     
                            
बुद्धिप्रकाश, विद्यासागर?
पर अब कुछ दिन को कहा मान,
तुम लाला मूसलचंद बनो ! 
अब मूर्ख बनो, मतिमंद बनो !

यदि मूर्ख बनोगे तो प्यारे,
दुनिया में आदर पाओगे।
जी, छोड़ो बात मनुष्यों की,
देवों के प्रिय कहलाओगे!
लक्ष्मीजी भी होंगी प्रसन्न,
गृहलक्ष्मी दिल से चाहेंगी।
हर सभा और सम्मेलन के 
अध्यक्ष बनाए जाओगे !  आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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