नई क्रांति : समाज को आईना दिखाती गोपालप्रसाद व्यास की हास्य कविता

Gopal Prasad Vyas
                
                                                             
                            कल मुझसे मेरी 'वे' बोलीं
                                                                     
                            
"क्योंजी, एक बात बताओगे?"
"हाँ-हाँ, क्यों नहीं!" जरा मुझको
इसका रहस्य समझाओगे?
देखो, सन् सत्तावन बीता,
सब-कुछ ठंडा, सब-कुछ रीता,
कहते थे लोग गदर होगा,
आदमी पुनः बंदर होगा।
पर मुन्ना तक भी डरा नहीं।
एक चूहा तक भी मरा नहीं!  आगे पढ़ें

1 month ago

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