गोपाल प्रसाद व्यास की हास्य कविता: हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम

Gopal Prasad Vyas
                
                                                             
                            हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम !
                                                                     
                            
शब्दकोश में प्रिये, और भी
बहुत गालियां मिल जाएंगी
जो चाहे सो कहो, मगर तुम
मेरी उमर की डोर गहो तुम !

हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम !
क्या कहती हो-दांत झड़ रहे?
अच्छा है, वेदान्त आएगा।
दाँत बनाने वालों का भी
अरी भला कुछ हो जाएगा। आगे पढ़ें

4 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X