भारतेंदु हरिश्चंद्र की हास्य ग़ज़ल: नींद आती ही नहीं...

भारतेंदु हरिश्चंद्र
                
                                                             
                            नींद आती ही नहीं धड़के की बस आवाज़ से
                                                                     
                            
तंग आया हूँ मैं इस पुरसोज़ दिल के साज से

दिल पिसा जाता है उनकी चाल के अन्दाज़ से
हाथ में दामन लिए आते हैं वह किस नाज़ से

सैकड़ों मुरदे जिलाए ओ मसीहा नाज़ से
मौत शरमिन्दा हुई क्या क्या तेरे ऐजाज़ से आगे पढ़ें

1 month ago

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