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Best Hasya Poem of Shail Chaturvedi Aankh Aur Ladki

हास्य

उसने हमें देखा और बाईं चल गई: शैल चतुर्वेदी

अमर उजाला, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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वैसे तो एक शरीफ इंसान हूँ, 
आप ही की तरह श्रीमान हूँ, 
मगर अपनी आँख से, 
बहुत परेशान हूँ।

अपने आप चलती है,
लोग समझते हैं -चलाई गई है, 
जान-बूझ कर चलाई गई है, 
एक बार बचपन में, 
शायद सन पचपन में, 
क्लास में ,
एक लड़की बैठी थी पास में, 
नाम था सुरेखा, 
उसने हमें देखा, 
और बाईं चल गई, 
लड़की हाय-हाय कहकर, 
क्लास छोड़ बाहर निकल गई, 
थोड़ी देर बाद 
प्रिंसिपल ने बुलाया,
लम्बा-चौड़ा 
लेक्चर पिलाया,
हमने कहा कि जी भूल हो गई, 
वो बोले-ऐसा भी होता है, 
भूल में, 
शर्म नहीं आती ऐसी गन्दी हरकतें करते हो, 
स्कूल में?
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इससे पहले कि हकीकत बयां करते...

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