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Ashok Chakradhar poetry democracy

हास्य

डेमोक्रैसी क्या होती है... अशोक चक्रधर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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पार्क के कोने में
घास के बिछौने पर लेटे-लेटे
हम अपनी प्रेयसी से पूछ बैठे—
क्यों डियर!
डेमोक्रैसी क्या होती है?
वो बोली—
तुम्हारे वादों जैसी होती है !
इंतजार में
बहुत तड़पाती है,
झूठ बोलती है
सताती है,
तुम तो आ भी जाते हो,
ये कभी नहीं आती है!

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एक विद्वान से पूछा...

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