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हास्य

" सफलता का खरा मूलमंत्र "

Anil Pachori

11 कविताएं

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बात पते की एक बताऊं,
तुम पढ़ना ध्यान लगाय,
जो अमली जामा पहनाया,
तो प्रगति संग हो जाय,

प्रगति संग हो जाय,
नहीं इसमें कोई घाटा,
श्रम का करके त्याग,
करो ज़िम्मेदारी को टाटा,
 
न लागे कोई श्रम
न लागे कोई पूँजी
'चाटुकारिता' वो मंत्र
जो है प्रगति की कुंजी,
 
चाटुकारिता (Sycophancy).....
 
जिनकी करनी हो,
उनके इर्द गिर्द ही घूमों,
करो निर्धारित लक्ष्य,
चरणों को उनके चूमों,

करना होगा अति सम्मान ,
जिस पद के वो अधिकारी,
मानों स्वयं को गोपी
उनको समझो गिरधारी
 
उनको समझो लोह,
स्वयं को समझो चुम्बक,
समय निकालो तुम खूब,
करो तारीफों की बक-बक
 
करते रहना उनका आह्वान,
जब तक वो हिल ही न जाए,
दोहराओ ये क्रियाएं खूब,
सफलता,जब तक मिल न जाए

जब पा जाओ तुम लक्ष्य,
तो केवल बदलो गिरधारी,
दोहराते जाओ ये मंत्र,
बन परिश्रमी "चाटुकारी “
------------------
अनिल पचौरी

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