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अल्हड़ बीकानेरी

हास्य

अल्हड़ बीकानेरी की हास्य कविता ‘समय का फ़ेर’

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कैसा क्रूर भाग्य का चक्कर
कैसा विकट समय का फेर
कहलाते हम- बीकानेरी
कभी न देखा- बीकानेर

जन्मे ‘बीकानेर’ गाँव में
है जो रेवाड़ी के पास
पर हरियाणा के यारों ने
कभी न हमको डाली घास

हास्य-व्यंग्य के कवियों में
लासानी समझे जाते हैं
हरियाणवी पूत हैं-
राजस्थानी समझे जाते हैं


साभार- कविताकोश 

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