अल्हड़ बीकामेरी की हास्य कविता: बासठवें बर्थ-डे पे अपनी 

अल्हड़ बीकानेरी
                
                                                             
                            बासठवें बर्थ-डे पे अपनी 
                                                                     
                            
ही मोरनी को 
सीढ़ियों से मैंने था पुकारा 
मेरे राम जी

देखते ही कलियाँ गुलाब की 
करों में मेरे 
मोरनी ने बदला उतारा 
मेरे राम जी 

सीढ़ियों मैं चार चढ़ा, इतने 
में फूट पड़ा 
माथे से रुधिर का फ़व्वारा 
मेरे राम जी  

फूल मेरी मोरनी ने मारा था 
मगर, हाय! 
गमले समेत दे के मारा 
मेरे राम जी। 
1 month ago

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