पूरब और पश्चिम में जब रास्ते बँटने लगते हैं, हिन्दी अपनी मिट्टी से जुड़ने का हुनर देती है

काव्य कैफे
                
                                                             
                            हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए चलाए गए अमर उजाला का ‘हिंदी हैं हम’ अभियान सतत जारी है। इस अभियान की कड़ी में अमर उजाला काव्य हिंदी पखवाड़ा मना रहा है जिसके तहत कविता-कहानी, ऑनलाइन कवि सम्मेलन और आज का शब्द इत्यादि सामग्री पाठकों के सामने प्रस्तुत करता आ रहा है। इसी क्रम में  काव्य कैफ़े का आयोजन किया गया। इस ऑनलाइन कवि सम्मेलन में विदेशों में रहते हुए हिंदी में लिखने-पढ़ने वाले मेहमान कवियों को आमंत्रित किया गया।
                                                                     
                            
 आयोजन में डॉ. पुष्पिता अवस्थी (नीदरलैंड्स), ज़किया ज़ुबैरी (लंदन), तेजेंद्र शर्मा (लंदन), विवेक आसरी (ऑस्ट्रेलिया) और आशुतोष कुमार (लंदन) शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि और लेखक डॉ. ओम निश्चल ने किया।



डॉ. ओम निश्चल ने हिन्दी दिवस की पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए आयोजन की उपयोगिता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिन्दी कवि सम्मेलन की भाषा बनती है, गीतों की भाषा बनती है, जो सड़कों से लेकर संसद तक बोली जाती है। हिन्दी को जो स्वरूप बहुत पहले ले लेना चाहिए था उसके लिए इसे आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान-तकनीक की भाषा बनने तक का सफर तय करना है। आगे पढ़ें

1 month ago

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