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Hasya Kavi Ashok chakradhar

हलचल

पद्मश्री कवि अशोक चक्रधर, जो सिखाते हैं कि 'हंसो तो बच्चों जैसी हंसी'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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किसी के चेहरे पर आपके कारण मुस्कान हो तो ईश्वर प्रसन्न होते हैं, अगर ऐसा है तो निश्चित ही ईश्वर 'अशोक चक्रधर' से अतिशय ख़ुश होंगे। उत्तर प्रदेश के खुर्जा में 8 फरवरी 1951 को पैदा हुए अशोक ने जब अपनी शब्द-धारा को ज़माने में बांटा तो उसका पान करने वालों में 'स्ट्रेस रिलीज़ हॉर्मोन' विकसित होने लगे। ये कथनी समुचित ही है कि जब अशोक लिखते हैं तो कलम भी ठहाके लगाती है। पद्म श्री से सम्मानित यह कलाकार न सिर्फ़ हास्य-व्यंग्य लेखन के महारथी हैं बल्कि इन्होंने निर्देशन से लेकर अभिनय तक अपने फ़लक का विस्तार किया है। 

पद्मश्री अशोक चक्रधर इस बार अमर उजाला काव्य के कार्यक्रम 'शख़्सियत' में हमारे मेहमान होंगे। 

अशोक चक्रधर का पहला साहित्यिक परिचय अपने पिता के माध्यम से हुआ। पिता द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में उन्होंने अपनी पहली कविता सुनाई थी जहां उन्हें महाकवि सोहनलाल द्विवेदी की आशीर्वाद मिला। इसके बाद अशोक चक्रधर की साहित्यिक यात्रा प्रारम्भ हो गयी। कविता, नाटक, अनुवाद के साथ-साथ उन्होंने हिंदी के प्रयोगों को लेकर भी कई कार्य किए। इसके साथ ही वह जन नाट्य मंच के संस्थापक सदस्य भी हैं। उनके कविता संग्रहों में 'बूढ़े बच्चे, सो तो है, भोले भाले, तमाशा, चुटपुटकुले, हंसो और मर जाओ, देश धन्या पंच कन्या, ए जी सुनिए' आदि शामिल हैं।

आइए पढ़ते हैं उनकी लिखी कुछ ख़ास रचनाएं

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