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धरती मां की बेटी हैं हम!

Gulrez Allahabadi

3 कविताएं

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धरती मां की बेटी हैं हम!
जैसी मां है वैसी हैं हम!!

धरती का ऋंगार है हमसे,
ये सारा संसार है हमसे,

धरती की हरियाली हैं हम!
जैसी मां है वैसी हैं हम!!

प्रेम शिखा है देश हमारा,
मानवता संदेष हमारा,

सत्य अहिंसा वादी हैं हम!
जैसी मां है वैसी हैं हम!!

रानी लक्ष्मी रज़िया जोधा,
इन्दिरा शीला माया ममता,

राधा सीता कुन्ती हैं हम!
जैसी मां है वैसी हैं हम!!

यूं न जलाओ यूं न गाड़ो,
यूं न हमको कोख़ मे मारो,

अवतारों की जननी हैं हम!
जैसी मां है वैसी हैं हम!!

नन्ही कोपल बढ़ने दो तुम,
हमको पढ़ने लिखने दो तुम,

फिर देखो के कैसी हैं हम!
जैसी मां है वैसी हैं हम!!

श्रृष्टि की रचना को समझो,
नारी की महिमा को समझो,

दुर्गा शेरा काली हैं हम!
जैसी मां है वैसी हैं हम!!

हमसे ही गुलरेज़ है गुलशन,
खुशियों से लबरेज़ है गुलशन,

बेला चम्पा जूही हैं हम!
जैसी मां है वैसी हैं हम!!

-गुलरेज़ इलाहाबादी

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