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Famous shayar Anjum Jaunpuri

हलचल

मशहूर शायर अंजुम जौनपुरी का निधन

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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‘रुक जाओ सुबह न हो, ये रात आखरी, शायद हो ये जिंदगी के लम्हात आखिरी, मरने के बाद कब्र पर आना तुम जरुर, अंजुम यह कह रहा है कोई बात आखिरी'
ऐसा लिखने वाले मशहूर शायर अंजुम जौनपुरी ने मंगलवार को आख़िरी सांस लीं।

वह लंबे अर्से से बीमार चल रहे थे। उनका पैर कटने के बाद से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। यहां तक की उनकी याददाश्त भी चली गयी थी। 1971 में अंजुम जौनपुरी परिवहन विभाग में टेक्निशियन के पद पर तैनात हुए थे और पूर्वांचल के कई जिलों में अपनी सेवाएं दी लेकिन शायरी से उनका जुड़ाव इतना था कि इन्होंने 2002 में सरकारी नौकरी से त्याग पत्र दे दिया और सिर्फ उर्दू शायरी के लिए ही पूरा वक्त देने लगे।

इस बीच हालातों ने उनका साथ नहीं दिया और वह मुफ़लिसी के दौर में पहुंच गए थे। उनके शेरों में ज़िंदग़ी की गहराई जानने को मिलती है। उन्होंने कहा कि ‘गर्दिश के साये कोई रोये, कोई मुस्कुराए, जाने कितनी निगाहें उठी, जब भी गुजरे वह सर झुकाए' लोगों के दिलों में उतर गयी। देश-विदेश में सभी जगह लोग अंजुम साहब की ग़ज़लों के दीवाने हैं। 
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