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गीतकार ओम निश्चल के गीतों से गूंज उठी काव्य कैफे की महफ़िल

हलचल

गीतकार ओम निश्चल के गीतों से गूंज उठी काव्य कैफे की महफ़िल 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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यह बेला जीत की 
यह बेला हार की 
यह बेला शब्दों के 
नखशिख श्रृंगार की 


उपरोक्त पंक्तियां जब हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि एवं गीतकार ओम निश्चल जी ने तरन्नुम में पढ़ी तो काव्य कैफे की महफ़िल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। साफ ज़ुबान और अवाज़ में एक खास तरह ख़नक में ओम निश्चल जी ने कई गीत गाये। हमेशा की तरह आज की महफ़िल भी लाइट और कैमरे के बीच काफी की चुस्कियों के साथ शुरू हुई और एक बढ़कर एक कविताएं पढ़ी गईं। आगे पढ़ें

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