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Amar Ujala kavya brij bhasha special

हलचल

भोजपुरी के बाद अब आप सबहिन कूं 'काव्य' में मिलैगी ब्रज भाषा की सौंधी महक

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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आंचलिक भाषाओं की कविताओं को जन-मानस के बीच लाने के लिए अमर उजाला काव्य सक्रिय है। इस क्रम में हमने पहले भोजपुरी भाषा की कविताएं और साहित्य अपने पाठकों के सामने रखे और उसे काफ़ी सराहा भी गया। इसके बाद हम दूसरी आंचलिक भाषा 'ब्रज' के काव्य को आपके बीच लेकर आ रहे हैं।

ब्रज भाषा को कृष्ण की नगरी मथुरा व उससे आस-पास सटे क्षेत्रों में बोला जाता है, हिन्दी में खड़ी बोली से पहले काव्य-रचना ब्रज में ही की जाती थी। यह सूरदास, रसखान जैसे बड़़े कवियों की भाषा है। अमर उजाला 'काव्य' में आप पढ़ेंगे ब्रज में लिखी कविताएं, वहां के कवियों के प्रसंग और उनका भक्ति-भाव साथ ही वह फ़िल्मी गीत जो ब्रज की बोली में लिखे गए। 

आप ब्रज में लिखी अपनी रचनाएं अमर उजाला 'काव्य' के 'मेरे अल्फ़ाज़' सैक्शन में भेज सकते हैं। 
https://www.amarujala.com/kavya/ugc-form
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