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Amar Ujala Kavya and vani prakashan organise Kavita Kumbh in World Book fair 2018

हलचल

कविता कुंभ में अशोक चक्रधर की 'माई रे माई एफडीआई आई' ने वाहवाही बटोरी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्‍ली

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विश्व पुस्तक मेले में वाणी प्रकाशन और अमर उजाला काव्य का कविता कुंभ नवोदित कवियों और उनकी पुस्तकों के विमोचन के लिए समर्पित था लेकिन संयोगवश उसमें काव्य और लेखन की दो बड़ी हस्तियों ने भी भाग लेकर समारोह को रोमांच से भर दिया। प्रसिद्ध कवि अशोक चक्रधर और बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्‍लीमा नसरीन ने अपनी कविताओं से समाज की समस्याओं पर कड़े प्रहार किए। हाल ही में एफडीआई पर 100 फीसदी की मंजूरी पर केंद्रित अशोक चक्रधर की कविता 'माई रे माई एफडीआई आई' ने काफी वाहवाही बटोरी। चक्रधर ने इस कविता में एफडीआई पर एक चूहे की मनोव्यथा को व्यक्त किया। तस्लीमा नसरीन ने बांग्ला में ‌लिखी अपनी कविता का पाठ किया। जिसमें सामाजिक और धार्मिक विषमता पर जोर दिया गया था।  

इन दो प्रतिष्ठित हस्तियों के अलावा समारोह में नए और पारंपरिक कवियों की ‌कविताओं ने काव्य प्रेमियों को नए प्रतिमान दिए। शुक्रवार को सायं 5 बजे प्रगति मैदान के हॉल नंबर 12 में नई सोच की कविताओं ने भी समस्याओं पर कड़े प्रहार किए। वाणी प्रकाशन के बैनर तले तथा अमर उजाला काव्य के मीडिया सहयोग से आयोजित इस समारोह में प्रसिद्ध कवियित्री अनामिका, कवि निलय उपाध्‍याय, अरूण देव, मदन कश्यप, सुनीता बुद्धिराजा, ज्योति चावला और रजत रानी मीनू ने अपनी कविताओं का पाठ किया। समारोह का संचालन पत्रकार संजय पालीवाल ने किया। अनामिका ने कविताओं के जरिए सांस्कृतिक संवाद को एक सफल जनतंत्र के लिए आवश्यक बताया। 

युवा कवि और वजीर फिल्म के गीतकार दीपक रमोला ने अपनी नई किताब 'इतना तो मैं समझ गया हूं' से 'लम्हा' कविता का पाठ कर अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया। कवि निलय उपाध्याय ने अपनी नवीन किताब 'मुंबई की लोकल' की एक कविता 'लोकल डिब्बे में एक हीरोइन' का पाठ कर समाज में स्‍त्री के बदलते दायरे पर गहन प्रकाश डाला। कवि मदन कश्यप ने अपने काव्य संग्रह 'दूर तक चुप्पी से' 'उद्धारक' कविता का पाठ कर समाज की विषमता को उजागर किया। कश्यप ने दंतेवाड़ा काव्य संग्रह से भी कविताएं पेश की। अरुण देव ने 'आनंद घन सुजान' से कविता पेश की जो स्‍त्री चरित्र को नई चुनौती के दायरे में पेश कर रही थी। सुनीता बुद्धिराजा ने 'द्रौपदी' कविता के जरिए समाज में स्‍त्री के अस्तित्व पर प्रकाश डाला। युवा कवि ज्योति चावला ने गुजरात दंगों पर 'उदासी' कविता का रोमांचक पाठ किया। 
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