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हाइकु

तू है अनोखा

Manish Kumar

114 कविताएं

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मत सोच तू
ए तड़पते दिल
मत रोना तू।

न बहा आंसू
तरसते नयन
जाम हो जा तू।

मुस्कराना तू
काम तेरा अधर
चीख मत तू।

कट जाये जो
ये गरदन तेरी
न आएगी वो।

न रोएगी वो
जनाजा जब उठे
कहेगी, जा सो।

न कर फिक्र
जब तक जी रहा
छोड़ दे जिक्र।

धड़केगा तू
तो हज़ार मिलेंगी
यह लिख दूं।

रचना नहीं
महिला पुरुष की
समझें सही।

जो खाया धोखा
शोक मत कर तू
तू है अनोखा।

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