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Jeth Ki Garmi Me Pathik Ka Path

हाइकु

जेठ की गर्मी में पथिक का पथ...

Manish Kumar

114 कविताएं

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जेठ माह है
कोप तेज धूप का
पथिक रुक।

तपती धूप
सूरज तो जलता
पथिक रुक।

लू का वेग है
कोप तेज आंधी का
पथिक रुक।

जलती जमीं
तपती हुई धूल
पथिक रुक।

सूनी राहें हैं
टेढ़ी पगडंडियां
पथिक रुक।

जलते पैर
ये राहें हैं कठिन
पथिक रुक।

विश्राम कर
दे खुद को आराम
पथिक रुक।

पर न रुक
विश्राम कर,बढ़
पथिक चल।

चलना ही है
ये जिंदगी का लक्ष्य
पथिक चल।

हार न मान
उठ आगे बढ़
पथिक चल

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