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Umrao Jaan ada book review

इस हफ्ते की किताब

उमराव जान अदा: कहो उमराव, कैसी हो ?

मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

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'उमराव जान अदा' एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसे वक्त और हालातों ने लखनऊ की मशहूर तवायफ बना दिया। हालातों से हारकर उसने इस पेशे को चुना जरूर, लेकिन हमेशा उसके मन में उसका अपना घर बसा रहा। सालों बाद जिंदगी उसे एक मौका जरूर देती है अपनों से मिलने का, लेकिन परिवार की बदनामी उसके पांव रोक लेती है। उमराव जान की कहानी एक उपन्यास के रूप में हमारे सामने है। उमराव जान पर यह किताब 1899 में पहली बार उर्दू में मिर्जा हादी 'रुसवा' ने लिखी थी। इसे उर्दू से हिंदी में अनुवाद किया है शकील सिद्दीकी ने। उपन्यास का प्रत्येक पात्र अलग- अलग सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है। 

किताब- उमराव जान अदा 
लेखक- मिर्जा हादी 'रुसवा'
प्रकाशक- राजपाल एंड सन्स प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य- 275 रुपये
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