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The heart fullness way book review in hindi

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द हार्टफुलनेस वे: जीने के लिए भी ज़रूरी

- ज्योतिर्मय

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हार्टफुलनेस अभ्यास की विधि आत्मा के लिए सात्विक पोषण जुटाती और अनर्गल आवरण को हटाती है। फिर भीतर बच्चे जैसी मासूमियत को प्रकट कर देती है।

जीवन में हमारे लिए क्या नियत है और अगले पल क्या होने वाला है, यह शायद ही किसी को पता हो और यह रहस्य ही जिंदगी की सबसे बड़ी खूबसूरती है। कहावत मशहूर है कि भविष्य का अज्ञान परमात्मा का सबसे बड़ा अनुग्रह है। पुस्तक के लेखक कमलेश डी. पटेल कहते हैं कि पिछले छह दशकों में उन्हें कई आशीर्वाद मिले। पहली बार शायद 1976 में तब मिला, जब वे अहमदाबाद में फार्मेसी की पढ़ाई कर रहे थे। घटना का विवरण देते हुए वे अपने एक सहपाठी मित्र का आभार जताते हैं कि हार्टफुलनेस ध्यान पद्धति से परिचित होने में वे एक निमित्त हो सके। कुछ महीने बाद वे महात्मा रामचंद्र के संपर्क में आए। उन्हीं के नाम से साधकों का एक छोटा-मोटा संगठन बना। अनुयायी उन्हें गुरु नहीं, बाबूजी जैसा आत्मीय संबोधन देते हैं। हार्टफुलनेस ध्यान, जो उन्हीं की देन है, करने के बाद पहला अनुभव बहुत गहन था। उससे अद्भुत यह कि बाद के जीवन में तो जगत के और आयाम खुलते रहे। उस तरह की समृद्धि और भी कई साधकों को ध्यान के जरिए मिली है। ध्यान की प्रक्रिया बहुत सरल है।

ज्यादा कुछ करना जरूरी नहीं है, जिंदगी में जो अनायास हो रहा है, उससे सहमत होकर बैठना और आंखें बंदकर अपने अस्तित्व के स्रोत पर अपना ध्यान केंद्रित करना काफी है। हार्टफुलनेस में हम अपनी चेतना की गहराइयों में उतरते हैं, उसका विस्तार करते हैं और वास्तविक क्षमता को उजागर करने के लिए चेतना से भी परे चले जाते हैं। मुझे आशा है कि आप इस पुस्तक का आनंद लेंगे और जो कुछ मैंने जीवन की इस यात्रा में अभी तक सीखा है, उससे लाभ उठाएंगे। पुस्तक में दी गई हार्टफुलनेस अभ्यास की विधि आत्मा के लिए सात्विक पोषण जुटाती और अनर्गल आवरण को हटाती है। फिर भीतर बच्चे जैसी मासूमियत और हर्ष की उस चमक को प्रकट कर देती है, जिससे जीवन वास्तव में अर्थपूर्ण बन जाता है। कष्टों से पार पाने तथा आशा और संतोष के साथ-साथ सुख-समृद्धि का कोई आसान तरीका मिले, तो कौन उस तरफ जाने की ललक नहीं दिखाएगा? लेखक दाजी कमलेश पटेल और जोशुआ पोलाक का यही दावा है। इन आध्यात्मिक अभ्यासों के जरिए हम रीति-रिवाजों और कर्मकांडों को पार करते हुए अनुभव और उससे भी आगे जा सकते हैं। कहा जा चुका है कि 1945 में रामचंद्र नाम के योगी ने रामचंद्र मिशन की स्थापना की। मिशन उनके नहीं, उनके गुरु के नाम पर स्थापित था और उनका नाम भी रामचंद्र था। वे फतेहगढ़ के थे और अभीप्सु जनों को पतंजलि के योग और आध्यात्मिकता की शिक्षा देते थे। इस विधि को सहजयोग भी कहते हैं। संगठन अब दुनियाभर में फैल गया है। यह विस्तार कमलेश डी. पटेल के कार्यकाल में हुआ। यह चमत्कार कमलेश डी. पटेल और जोशुआ पीलाक जैसे सिद्ध सहजयोगियों के कारण ही संभव हो पाया है।


किताब- द हार्टफुलनेस वे
लेखक-  कमलेश डी पटेल और जोशुआ पोलाक
प्रकाशक- वेस्टलैंड पब्लिकेशन्स, चेन्नई
मूल्य- 250 रुपये

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